
क्या तुम सच में जी रहे हो, या बस दिन गुज़ार रहे हो?
12 फरवरी, 2026
सुबह उठे, फ़ोन देखा, भागदौड़ शुरू। ऑफिस, काम, घर वापसी, सो गए। और फिर वही सिलसिला।
पर कब रुके तुम? कब पूछा खुद से – “मैं कैसा हूँ?”
हम दूसरों से बातें करते हैं, पर खुद से बात करना भूल गए हैं। वो आवाज़, जो सिर्फ तुम सुन सकते हो – उसे कब सुना आखिरी बार?
आज बस 2 मिनट निकालो।
आँखें बंद करो। साँस लो। और पूछो खुद से:
- क्या मैं वो कर रहा हूँ जो मुझे शांति देता है?
- क्या मैं किसी की नकल में खुद को भूल तो नहीं रहा?
- क्या मेरी छोटी ख़ुशियाँ अब भी मुझे ख़ुशी देती हैं?
तुम्हारे सवालों के जवाब तुम्हारे भीतर हैं। बस सुनने की ज़रूरत है।
आत्मसंवाद – ये सिर्फ एक शब्द नहीं, एक ज़रूरत है। अपने आप से दोस्ती करो। क्योंकि तुम्हारे साथ सबसे ज़्यादा वक्त तुम ही रहने वाले हो।
आज का सवाल: तुम्हारा दिल क्या कह रहा है, जो तुम्हारा दिमाग़ नहीं सुन रहा?
-Rakesh Karwasra
copyright@rakeshkarwasra
Bahut hi achhi sachi kr sochniye bat ki hai sir