–Rakesh Karwasra जब उम्र ने कंधे पर हाथ रखकर कहा—“चलो, अब थोड़ा धीमे चलें,”तब पहली बारमैंने समय की साँस सुनी। जो दिन बीत गए,वे अब स्मृतियों के दीप हैं,और जो बचे हैं—वे उधार की रोशनी नहीं,मेरी अपनी ज्योति हैं। अब किसी की विदाई पर आँसू नहीं,क्योंकि जानाजीवन का अपमान नहीं—उसकी पूर्णता है। मेरे बाद क्या…
Category: मनोभाव /Mind & Meaning -WEEKLY
आत्मसंवाद: शांति की तलाश में
दिनांक: 6 फरवरी, 2026 जब मन भटके, तो लौट आना सीखो आज सुबह जब मैं अपनी खिड़की से बाहर देख रहा था, तो एक चिड़िया को डाल पर बैठे देखा। हवा के झोंके से डाल हिल रही थी, लेकिन चिड़िया अपनी जगह स्थिर थी। वह न घबराई, न गिरी। बस अपने संतुलन में थी। मुझे…
खामोशी की ताक़त
Mind & Meaning – Weekly Article Day : 21 Jamaury 2026 हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं जहाँ बोलना ज़्यादा महत्वपूर्ण समझा जाता है।जो ज़ोर से बोलता है, वही सुना जाता है।जो तुरंत प्रतिक्रिया देता है, वही “सक्रिय” माना जाता है।लेकिन इस भीड़-शोर के बीच एक चीज़ है, जो अक्सर अनदेखी रह जाती…
जीवन की वह थकान, जो उम्र से पहले आ जाती है
जीवन में एक समय ऐसा भी आता है जब सब कुछ चलते हुए भी भीतर कुछ थम-सा जाता है।हम रोज़ उठते हैं, काम करते हैं, लोगों से मिलते हैं, ज़िम्मेदारियाँ निभाते हैं—और फिर भी दिन के अंत में ऐसा लगता है जैसे कुछ छूट गया हो। यह थकान शरीर की नहीं होती, यह जीवन की…