17 जनवरी 2026

“इस दुनिया में हर वो चीज़ संभव है…
जिसकी हम कल्पना कर सकते हैं।
मगर सवाल ये नहीं कि क्या संभव है…
सवाल ये है कि हम क्या चुनते हैं।
क्या हम खिड़कियों से झाँकते हुए
बस सपने देखते रहेंगे…
या चौखट लाँघकर
दरवाज़े से बाहर निकलेंगे…
जहाँ एक रास्ता
मुख्य सड़क तक जाता है…
और वही सड़क
हजारों रास्तों में बदल जाती है।
एक बार अगर निकल पड़े…
तो रास्ते खुद मंज़िल तक ले जाते हैं।
बस सीखना होगा—
रास्तों को पहचानना…
लोगों को समझना…
और हर मोड़ पर खुद को ढालना।
क्योंकि हम सब मुसाफ़िर हैं…
और सफ़र ही हमारी असली पहचान है।”
-Rakesh Karwasra