सुबह की चाय ठंडी हो रही थी, और मन ने अचानक कहा: “कल तूने कहा था – ‘मैं सच हूँ, और यही काफी है’… आज भी वही फील हो रहा है?” मैंने कप थामा और बोला: “नहीं। आज थोड़ा अलग है। कल मैंने खुद को ‘काफी’ माना था। आज मैं खुद से पूछ रहा हूँ…
Life in Words………..
सुबह की चाय ठंडी हो रही थी, और मन ने अचानक कहा: “कल तूने कहा था – ‘मैं सच हूँ, और यही काफी है’… आज भी वही फील हो रहा है?” मैंने कप थामा और बोला: “नहीं। आज थोड़ा अलग है। कल मैंने खुद को ‘काफी’ माना था। आज मैं खुद से पूछ रहा हूँ…