सुबह उठते ही आँखें खुलीं तो सीने में एक हल्की-सी खुशी थी। न कोई वजह, न कोई बड़ी खबर। बस इतना कि मैं उठा। साँस ली। और जी रहा हूँ। चाय बनाई। कटोरा हाथ में लिया। खिड़की खोली। हनुमानगढ़ की सुबह आज बहुत साफ़ थी। दूर खेतों में हल्की धुंध बिछी हुई थी, पर आसमान…