इंसान अक्सर एक ही बात दोहराता है— “समय ही नहीं है।”लेकिन सवाल यह नहीं कि समय नहीं है,सवाल यह है कि हम किसमें उलझे हुए हैं? हम बिज़ी रहते हैं…पर किसी से ढंग से बात नहीं कर पाते।काम करते हैं…पर संतोष नहीं मिलता।दिन निकल जाता है…पर लगता है जैसे कुछ जिया ही नहीं। तो फिर…