सुबह उठकर सबसे पहले खिड़की नहीं खोली। बिस्तर पर ही लेटे रहे। चाय बनाने की आदत आज थोड़ी देर के लिए रुक गई। मन ने पूछा— “क्यों नहीं उठ रहा? आज भी रविवार जैसा दिन है?” मैंने आँखें बंद कीं। सिर्फ़ साँस ली। और लगा— कभी-कभी उठना भी एक बहुत बड़ा फैसला होता है। उठकर…