सुबह उठकर खिड़की खोली तो हवा में एक हल्की-सी ताज़गी थी। धुंध लगभग चली गई, ठंडक भी कम हो गई। चाय बनाई – इस बार वो गर्म थी। मन ने मुस्कुराते हुए कहा: “कल तू ठंडक को गले लगा रहा था… आज गर्माहट कैसी लग रही है?” मैंने कप थामा और बोला: “अच्छी लग रही…
Life in Words………..
सुबह उठकर खिड़की खोली तो हवा में एक हल्की-सी ताज़गी थी। धुंध लगभग चली गई, ठंडक भी कम हो गई। चाय बनाई – इस बार वो गर्म थी। मन ने मुस्कुराते हुए कहा: “कल तू ठंडक को गले लगा रहा था… आज गर्माहट कैसी लग रही है?” मैंने कप थामा और बोला: “अच्छी लग रही…