सुबह उठकर सबसे पहले मन ने पूछा: “कल तूने कहा था – गर्माहट हो या ठंडक, दोनों मेरी हैं… आज क्या फील हो रहा है?” मैंने खिड़की खोली। आज हवा में न ठंडक थी, न तेज़ गर्मी। बस एक हल्की-सी नरमी। चाय बनाई – न ज्यादा गर्म, न ठंडी। बिल्कुल संतुलित। जैसे प्रकृति भी कह…