आत्म-प्रेम यात्रा ये यात्रा कोई मंज़िल नहीं है, ये एक रास्ता है—जो कभी खत्म नहीं होता। कभी धूप में चलते हो, कभी बारिश में भीगते हो, कभी ठंडी हवा में काँपते हो, कभी गर्माहट में सुकून पाते हो। पर हर कदम पर एक ही सवाल रहता है: “क्या मैं खुद को पर्याप्त मान रहा हूँ?”…