“अपनी कहानी का नायक” आज एक अजीब-सी बात समझ आई—हममें से बहुत से लोगअपनी ज़िंदगी नहीं जी रहे होते,हम बस दूसरों की कहानियाँ पढ़ रहे होते हैं। किसी की सफलता मेंअपना अधूरापन खोजते हैं,किसी की चमक मेंअपनी कमी। धीरे-धीरे ऐसा होता हैकि हम अपनी ही ज़िंदगी केदर्शक बन जाते हैं। हम देखते रहते हैंकि कौन…