सुबह की चाय ठंडी हो रही थी, और मन ने अचानक कहा: “कल तूने कहा था – ‘मैं सच हूँ, और यही काफी है’… आज भी वही फील हो रहा है?” मैंने कप थामा और बोला: “नहीं। आज थोड़ा अलग है। कल मैंने खुद को ‘काफी’ माना था। आज मैं खुद से पूछ रहा हूँ…
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आज का आत्मसंवाद – 15 फरवरी 2026 (Inner Dialogue – DAILY)
सुबह उठते ही पहला विचार आया: “कल वैलेंटाइन डे था… आज क्या बचा है? सिर्फ़ एक दिन का उत्सव खत्म हो गया?” मैंने खुद से कहा: “नहीं। आज वो दिन है जब प्यार की असली परीक्षा होती है। जब गुलाब की पंखुड़ियाँ मुरझा जाती हैं, चॉकलेट ख़त्म हो जाती है, मैसेज रीड होकर आर्काइव में…