आज खुद से एक अजीब सवाल पूछा— “तू सच में जी रहा है…या बस दूसरों को दिखा रहा है कि जी रहा है?” दिन भर भागता रहा—काम, लोग, बातें, जिम्मेदारियाँ…पर रात को समझ आया— मैं कहीं पहुँचा ही नहीं। मैं बस व्यस्त था…मगर ज़िंदा नहीं। अजीब है ना—हम जिंदगी को आसान बनाने के लिएइतना कुछ…