Day : 17 January 2026 सुबह है…मन अब भी रात से निकल रहा है।सब ठीक दिखता है,पर भीतर कुछ थका हुआ है।फिर भी उठ खड़ा हुआ हूँ।क्योंकि उम्मीद अब भी ज़िंदा है।मैं जल्दी नहीं पहुँचूँगा,पर पहुँचूँगा — यही काफ़ी है। –Rakesh Karwasra
Life in Words………..
Day : 17 January 2026 सुबह है…मन अब भी रात से निकल रहा है।सब ठीक दिखता है,पर भीतर कुछ थका हुआ है।फिर भी उठ खड़ा हुआ हूँ।क्योंकि उम्मीद अब भी ज़िंदा है।मैं जल्दी नहीं पहुँचूँगा,पर पहुँचूँगा — यही काफ़ी है। –Rakesh Karwasra