(Inner Dialogue – DAILY)

सुबह की पहली किरण ने खिड़की से झाँका तो मन ने तुरंत पूछ लिया: “आज फिर वैलेंटाइन डे है… क्या तू तैयार है इस दिन के लिए?”
मैंने हल्के से मुस्कुराकर जवाब दिया: “तैयार तो हर दिन होना चाहिए… लेकिन आज थोड़ा और खास सवाल है – क्या मैं खुद से प्यार करने के लिए तैयार हूँ?”
दिमाग ने तपाक से काउंटर किया: “अरे, बाहर वाले तो गिफ्ट, रेड रोज़, चॉकलेट, डिनर की बात करेंगे… तू फिर वही पुरानी फिलॉसफी शुरू कर रहा है?”
हाँ, शुरू कर रहा हूँ। क्योंकि असली वैलेंटाइन डे वही है जो पहले अपने अंदर मनाया जाए। जो खुद को गले लगाए बिना किसी और को गले नहीं लगा सकता। जो खुद को माफ़ न करे, वो दूसरों से माफ़ी कैसे माँगेगा या देगा?
आज सुबह मैंने खुद से वादा किया:
- मैं आज कम से कम एक बार खुद को याद दिलाऊँगा कि मैं काफी हूँ – जैसा हूँ, वैसा।
- मैं अपनी उन छोटी-छोटी कमियों को भी प्यार करूँगा जो मैं रोज़ छुपाने की कोशिश करता हूँ।
- मैं किसी और की वैलेंटाइन बनने से पहले अपनी वैलेंटाइन बनूँगा।
फिर मन ने एक और सवाल दागा: “और अगर आज कोई स्पेशल मैसेज आए, कोई कॉल आए, कोई याद आए… तो?”
तो मैं मुस्कुराकर कहूँगा – “शुक्रिया। तुम्हारी याद ने मुझे फिर याद दिला दिया कि प्यार बाहर से शुरू नहीं होता, अंदर से फैलता है।” और फिर चुपचाप खुद की तरफ देखूँगा और कहूँगा: “तू सबसे पहले मेरा है।”
आज का छोटा सा संकल्प: सिर्फ़ एक व्यक्ति को स्पेशल फील करवाने की बजाय, मैं खुद को स्पेशल फील करवाऊँगा। क्योंकि जो खुद से शुरू होता है, वही लंबे समय तक चलता है।
तो बताओ ना… आज तुम अपने साथ वैलेंटाइन डे कैसे मना रहे हो? क्या खुद को एक प्यार भरी चिट्ठी लिखी? या कम से कम आईने में देखकर कहा – “तू अच्छा है यार”?
कमेंट में बताना। या बस मन ही मन कह देना। खुद तक बात पहुँच ही जाएगी।
शुभ प्रभात। खुद से प्यार करना न भूलना। बाकी सब अपने आप हो जाएगा।
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