सुबह की पहली किरण ने खिड़की से झाँका, लेकिन आज वो थोड़ी धीमी लग रही थी। मन ने तुरंत पूछा: “कल तूने धुंध में चलने की बात की… आज धुंध गई या अभी भी है?”

मैंने बाहर देखा। धुंध थोड़ी कम हुई थी, पर पूरी तरह नहीं गई। कुछ दूर तक दिख रहा था, कुछ अभी भी छिपा हुआ। ठीक वैसा ही जैसा मेरे अंदर का एक हिस्सा – कभी साफ़, कभी धुंधला।
तो मैंने खुद से कहा: “आज मैं धुंध से लड़ूँगा नहीं। न ही उसे जल्दी में भागने दूँगा। उसे रहने दूँगा जितनी देर वो रहना चाहे। क्योंकि धुंध भी एक मौसम है। वो आती है, सिखाती है धीरे चलना, और फिर चली जाती है। उसके जाने पर जो साफ़ दिखता है, वो पहले से ज़्यादा कीमती लगता है।”
मन ने फिर एक पुराना सवाल उठाया: “और अगर आज भी कुछ अधूरा रह गया? कोई फैसला टला हुआ, कोई बात कही न गई?”
मैंने गहरी साँस ली और बोला: “अधूरा रहने दो। जीवन कोई ड्राफ्ट नहीं है कि मैं बार-बार रिवाइज़ कर लूँ। जो आज हुआ, वही मेरी कहानी का हिस्सा है। अधूरापन नहीं, वो मेरी सच्चाई है। और सच्चाई को एडिट करने की ज़रूरत नहीं।”
आज का छोटा संकल्प:
- मैं आज एक काम को अधूरा छोड़ दूँगा – बिना गिल्ट के।
- और खुद से कहूँगा: “ये अधूरापन मेरी ताकत है, कमज़ोरी नहीं।”
- क्योंकि जो अधूरा रहता है, वो आगे बढ़ने की वजह देता है। जो पूरा हो जाता है, वो कभी-कभी रुक भी जाता है।
आज का एक सवाल खुद से: “अगर आज धुंध पूरी तरह न गई, तो क्या तू कल के लिए इंतज़ार करेगा… या आज के धुंधले में ही कुछ सुंदर ढूँढ लेगा?”
मेरा जवाब आज: आज के धुंधले में ही ढूँढ लूँगा। क्योंकि सुंदरता हमेशा साफ़ आसमान में नहीं मिलती। कभी-कभी धुंध के बीच में चमकती है – और वो चमक ज़्यादा गहरी होती है।
शुभ प्रभात, हनुमानगढ़ की हल्की धुंध वाली सुबह से। 🌫️🌅 खुद की धुंध को भी थोड़ा प्यार दो। वो भी तुम्हारी है।
-Rakesh Karwasra
copyright@rakeshkarwasra.com
#आत्मसंवाद #InnerDialogue #धुंध_में_सुंदरता #DailyReflection #IAmEnough #AdhooraPanBhiSundar #जीवन_कोई_ड्राफ्ट_नहीं #JagiHuiSubhein #HanumangarhDiaries #18February2026 #SelfLoveJourney
(