आज मन ने बहुत शांति से, लेकिन सीधे दिल में उतरते हुए पूछा —

“राकेश, तू दूसरों के लिए जितना समय निकालता है, खुद के लिए कभी समय निकालता है? या बस रोज़ की भागदौड़ में खुद को भी भूल जाता है?”
मैं कुछ पल के लिए रुक गया। सच तो ये था कि मैं खुद को आखिरी प्राथमिकता दे रहा था। काम, जिम्मेदारियाँ, उम्मीदें — सब पहले, और मैं… कहीं पीछे।
आज मैंने खुद से वादा किया: “मैं अब खुद को भी उतना ही महत्व दूँगा, जितना दूसरों को देता हूँ। थोड़ा समय, थोड़ी शांति, थोड़ा प्यार — मुझे भी चाहिए।”
आज का संकल्प:
- आज कम से कम 20 मिनट सिर्फ़ अपने लिए निकालना
- खुद से सख्ती की जगह नरमी से बात करना
- दिन के अंत में खुद से कहना — “तू भी महत्वपूर्ण है।”
क्योंकि हम दूसरों को तो भरपूर देते हैं, लेकिन खुद को खाली हाथ छोड़ देते हैं। आज से ये सिलसिला बदलना शुरू करते हैं।
आज तुमने खुद के लिए कितना समय निकाला? या आज भी खुद को आखिरी नंबर पर रख दिया?
कमेंट में अपनी सच्ची बात लिखना 👇
🌿 — Rakesh Karwasra