सुबह की पहली चाय हाथ में ली, लेकिन आज वो गर्म नहीं लग रही थी। मन ने तुरंत सवाल दागा: “कल तूने धुंध के बीच सुंदरता ढूँढने की बात की… आज क्या मिला?”

मैंने चाय का घूँट लिया – थोड़ा ठंडा हो चुका था। बाहर अब धुंध लगभग साफ़ हो गई थी, लेकिन हवा में अभी भी ठंडक बाकी थी। मन के अंदर भी कुछ ऐसा ही – साफ़ तो लग रहा है, पर पूरी तरह गर्म नहीं।
तो मैंने खुद से कहा: “आज मैं गर्माहट की तलाश नहीं करूँगा। न ही खुद को दोष दूँगा कि क्यों चाय ठंडी हो गई। ठंडक भी जीवन का हिस्सा है। कभी-कभी वो हमें याद दिलाती है कि गर्मी की कद्र कैसे करनी है। और ठंडक में भी जीना सीखना पड़ता है – बिना कंपकंपी के, बिना शिकायत के।”
मन ने फिर एक छोटा सा तीर मारा: “और अगर आज भी दिल थोड़ा ठंडा रहा? कोई भावना जगी नहीं, कोई उत्साह नहीं उठा?”
मैंने मुस्कुराकर जवाब दिया: “तो ठंडा रहने दो। जीवन कोई ड्राफ्ट नहीं है कि मैं हर दिन गर्माहट का नया संस्करण लिख लूँ। कभी ठंडक, कभी गर्मी – दोनों मेरी कहानी हैं। ठंडक में भी मैं साँस ले सकता हूँ। और साँस लेना ही काफी है।”
आज का छोटा संकल्प:
- मैं आज अपनी ठंडक को नाम दूँगा – “ठंडक”।
- उसे जज नहीं करूँगा, बस साथ बैठने दूँगा।
- और खुद से कहूँगा: “ठंडक में भी मैं जीवित हूँ। यही मेरी जीत है।”
आज का एक सवाल खुद से: “अगर आज दिल पूरी तरह गर्म न हुआ, तो क्या तू खुद को असफल मानेगा… या समझेगा कि ठंडक भी एक तरह की शांति है?”
मेरा जवाब आज: ठंडक भी शांति है। क्योंकि गर्मी कभी-कभी जलाती है। ठंडक बस ठहरने देती है – और ठहराव में ही अगली सुबह की तैयारी होती है।
शुभ प्रभात, हनुमानगढ़ की हल्की ठंडी और साफ़ सुबह से। ☕❄️ अपनी ठंडक को भी थोड़ा गले लगाओ। वो भी तुम्हारी है। और वो भी गुज़र जाएगी – जब उसका समय आएगा।
-Rakesh Karwasra
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Bahut hii accha or umda likhte h sir aappki har ek line me aam aadami kii kahaani dekhi jaa skti hai..sach me
It’s amazing lines…..it’s correlate feelings to reality…..I relied that we should take time for ourselves…..😊
“Thank you so much 😊
I’m really glad it connected with your feelings.
Yes… taking time for ourselves isn’t selfish, it’s necessary. That’s where clarity and strength begin.”
If you want something a little deeper:
“Your words mean a lot. When feelings meet reality, growth begins. And yes, giving ourselves time is the purest form of self-respect.”