07 अप्रैल 2026 (मंगलवार)

आज मन ने बिना किसी चेतावनी के एक सवाल छोड़ दिया —
“राकेश, तू जितना दूसरों को समझाने की कोशिश करता है, क्या कभी खुद को भी उतना समझने की कोशिश की है?”
मैं चुप हो गया। क्योंकि जवाब पता था — नहीं किया।
हम अक्सर दूसरों के लिए वक्त निकालते हैं, उनकी बात सुनते हैं, उन्हें सलाह देते हैं। लेकिन खुद की आवाज़ को? उसे अक्सर बीच में ही दबा देते हैं।
आज मैंने पहली बार खुद को पूरा सुनने की कोशिश की। सारी चुप्पी, सारी अधूरी इच्छाएँ, सारी छोटी-छोटी शिकायतें और छुपी हुई उम्मीदें — सब सामने आईं।
फिर मैंने खुद से धीरे से कहा: “तू अकेला नहीं है। तू जितना टूटा हुआ महसूस करता है, उतना टूटा हुआ नहीं है। बस थोड़ा सा ध्यान और थोड़ा सा प्यार तुझे भी चाहिए।”
आज का संकल्प:
- खुद की एक बात को बिना जज किए पूरा सुनना
- खुद को वो सलाह देना जो मैं दूसरों को देता हूँ
- और रात को सोने से पहले खुद से कहना — “तू काफी है, ठीक जैसे है।”
क्योंकि सबसे गहरी बातचीत अंदर होती है — जब हम दूसरों की आवाज़ बंद करके, अपनी आवाज़ को सुनते हैं।
आज तुमने खुद को कितना सुना? कमेंट में अपनी एक सच्ची बात लिखना 👇
— Rakesh Karwasra