DAY- 16 January 2026 आज खुद से कहा—धीरे चलो, हर जवाब आज ज़रूरी नहीं। -Rakesh Karwasra FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link
खामोशी के बीच हम
शादी के बाद शुरू में सब कुछ जैसे एक उत्सव होता है।हर सुबह एक उम्मीद लेकर आती है, हर रात एक वादा लेकर जाती है।लेकिन कुछ वर्षों बाद…वही सुबह जल्दबाज़ी बन जाती है और रातें सिर्फ़ थकान। अनुज और मीरा की शादी को दस साल हो चुके थे।घर था, काम था, जिम्मेदारियाँ थीं—बस जो धीरे-धीरे…
आत्मसंवाद/Inner Dialogue-DAILY
Day : 15 January चुप रहना हमेशा समझदारी नहीं,कभी-कभी मजबूरी होती है। -Rakesh Karwasra copyright@rakeshkarwasra.com Facebook Share on X LinkedIn WhatsApp Email Copy Link
Altruist | निस्वार्थता की वह ख़ामोश ताक़त
When living for others becomes a way of finding yourself आज की दुनिया में जहाँ हर रिश्ता लाभ–हानि की तराज़ू पर तौला जाता है,वहीं Altruist होना एक शांत लेकिन साहसी विद्रोह है। Altruist वह नहीं होता जो सब कुछ लुटा दे,बल्कि वह होता हैजो देते हुए खुद को खोता नहीं,बल्कि और गहरा पाता है। Altruism…
रिश्तों में चुप्पी क्या सच में ख़ामोश होती है?
रिश्तों की शुरुआत अक्सर शब्दों से होती है,लेकिन उनका सबसे गहरा हिस्सा चुप्पियों में पलता है।वह चुप्पी जो पहली नज़र में शांत लगती है,पर भीतर बहुत कुछ कह रही होती है। समय के साथ रिश्तों में बातें कम नहीं होतीं,बस कही जाने वाली बातें बदल जाती हैं।हम वही कहते हैं जो ज़रूरी लगता है,और जो…
आत्मसंवाद
Daily Quotes Series Day : 14 Janaury 2026 जो हर बात समझ लेता है,वही सबसे पहले थकता है। -Rakesh Karwasra Facebook Share on X LinkedIn WhatsApp Email Copy Link
“मैं लिखता हूँ वहाँ से, जहाँ शब्द नहीं होते — अनुभूति होती है।”
जब शब्द भीतर की चुप्पी से जन्म लेते हैं यह जगहतेज़ राय या तैयार जवाबों की नहीं है।यहाँ लेखनमन, जीवन और रिश्तों केउस हिस्से से आता हैजिसे अक्सर शब्द नहीं मिलते। मैं लिखता हूँसमझाने के लिए नहीं,साथ चलने के लिए। — Rakesh Karwasra Facebook Share on X LinkedIn WhatsApp Email Copy Link
जीवन की वह थकान, जो उम्र से पहले आ जाती है
जीवन में एक समय ऐसा भी आता है जब सब कुछ चलते हुए भी भीतर कुछ थम-सा जाता है।हम रोज़ उठते हैं, काम करते हैं, लोगों से मिलते हैं, ज़िम्मेदारियाँ निभाते हैं—और फिर भी दिन के अंत में ऐसा लगता है जैसे कुछ छूट गया हो। यह थकान शरीर की नहीं होती, यह जीवन की…
हार न मानना — आज के समय में सबसे ज़रूरी आदत
हार न मानना — आज के समय में सबसे ज़रूरी आदत आज का समय सबसे ज़्यादा तेज़, अनिश्चित और दबाव से भरा हुआ है।यहाँ लोग सपनों से नहीं, परिस्थितियों से हारते हैं।यहाँ संघर्ष बाहर से ज़्यादा मन के अंदर होता है। हार आज इसलिए नहीं आती कि इंसान कमजोर है,हार इसलिए आती है क्योंकि आज…
आत्मसंवाद
13 January 2026 मन वही बोझ उठाता हैजिसे शब्द बनने नहीं दिया गया। -Rakesh Karwasra Facebook Share on X LinkedIn WhatsApp Email Copy Link