Day : 23 January 2026 आज खुद से कहा—सब परफेक्ट नहीं है,पर दिल हल्का है।आज वजहें नहीं ढूँढीं,बस मुस्कुराना चुन लिया।और यही खुशी…मेरी जीत है। 😊 -Rakesh Karwasra copyright@rakeshkarwasra FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link
आत्मसंवाद/Inner Dialogue-DAILY
Day : 22 January 2026 आज खुद से कहा—जो शोर में नहीं दिखा,वही खामोशी में सँभल गया।आज मैं बच गया…और यही काफ़ी है। -Rakesh Karwasra copyright@rakeshkarwasra.com Facebook Share on X LinkedIn WhatsApp Email Copy Link
खामोशी की ताक़त
Mind & Meaning – Weekly Article Day : 21 Jamaury 2026 हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं जहाँ बोलना ज़्यादा महत्वपूर्ण समझा जाता है।जो ज़ोर से बोलता है, वही सुना जाता है।जो तुरंत प्रतिक्रिया देता है, वही “सक्रिय” माना जाता है।लेकिन इस भीड़-शोर के बीच एक चीज़ है, जो अक्सर अनदेखी रह जाती…
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Day : 21 Janaury 2026 आज खुद से कहा—सब ठीक साबित करना ज़रूरी नहीं,बस दिल का ठीक रहना काफ़ी है।जो तू निभा रहा है,वही तेरी सबसे बड़ी जीत है। 💙 -Rakesh Karwasra copyright@rakeshkarwasra.com Facebook Share on X LinkedIn WhatsApp Email Copy Link
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आज खुद से कहा Day : 20 January 2026 आज खुद से कहा—अगर आज कोई तेरा हाल नहीं पूछ रहा,तो इसका मतलब ये नहीं कि तू अकेला है…इसका मतलब ये है कि तू खुद को मजबूत बनाना सीख रहा है। रो ले अगर मन भारी है,पर रुक मत…क्योंकि जो भीतर से टूटकर भी चलता है,वही…
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Day : 19 January 2026 “मन हल्का-सा” आज मन से कहा—खुश रहने का मतलबहर हाल में मुस्कुराना नहीं,बल्कि खुद परबेवजह बोझ न डालना है। -Rakesh Karwasra copyright@rakeshkarwasra.com Facebook Share on X LinkedIn WhatsApp Email Copy Link
Happiness Essay Series | Essay 01
Happiness Essay Series | Essay 01 रविवार कोई साधारण दिन नहीं होता।वह समय नहीं, संवेदना होता है।एक ऐसा विराम,जहाँ घड़ी की सुइयाँ चलती तो हैं,पर मन उन पर ध्यान नहीं देता। आज इस ठहरे हुए दिन मेंमैंने खुद से एक पुराना प्रश्ननए ढंग से पूछा—खुशी आखिर है क्या? बहुत बार हम खुशी कोकिसी परिणाम से…
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Day : 18 Janaury 2026 आज मन ने मुझसेबिलकुल धीरे से कहा—खुशी कोई चकाचौंध नहीं,वह तो उस पल की तरह हैजब भीतर सब ठीक हो जाता हैऔर बाहर कुछ बदलने की ज़रूरत नहीं रहती। -Rakesh Karwasra copyright@rakeshkarwasra.com Facebook Share on X LinkedIn WhatsApp Email Copy Link
क्या सच में हमारे पास काम बहुत ज़्यादा है — या हम बस परेशान हैं?
इंसान अक्सर एक ही बात दोहराता है— “समय ही नहीं है।”लेकिन सवाल यह नहीं कि समय नहीं है,सवाल यह है कि हम किसमें उलझे हुए हैं? हम बिज़ी रहते हैं…पर किसी से ढंग से बात नहीं कर पाते।काम करते हैं…पर संतोष नहीं मिलता।दिन निकल जाता है…पर लगता है जैसे कुछ जिया ही नहीं। तो फिर…
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Day : 17 January 2026 सुबह है…मन अब भी रात से निकल रहा है।सब ठीक दिखता है,पर भीतर कुछ थका हुआ है।फिर भी उठ खड़ा हुआ हूँ।क्योंकि उम्मीद अब भी ज़िंदा है।मैं जल्दी नहीं पहुँचूँगा,पर पहुँचूँगा — यही काफ़ी है। –Rakesh Karwasra Facebook Share on X LinkedIn WhatsApp Email Copy Link