सुबह की पहली रोशनी खिड़की से आई तो मन ने कहा: “कल तूने पुराने में नया ढूँढने की बात की… आज क्या ढूँढा?” मैंने चाय बनाई। वही पुरानी गैस, वही पुरानी केतली, वही पुरानी आवाज़। लेकिन आज मैंने ध्यान से सुना। केतली की सीटी में एक छोटी सी लय थी – जैसे कोई पुराना गाना…