सुबह उठा तो खिड़की से ठंडी हवा आई। चाय बनाई, लेकिन आज कप में डालते वक्त हाथ रुक गया। मन ने कहा— “क्यों बना रहा है? पीने के लिए? या बस आदत है?” मैंने कटोरा मेज़ पर रख दिया। बिना पिए। बस खिड़की के पास खड़ा रहा। हनुमानगढ़ की सुबह में धुंध अभी भी थी।…
Life in Words………..
सुबह उठा तो खिड़की से ठंडी हवा आई। चाय बनाई, लेकिन आज कप में डालते वक्त हाथ रुक गया। मन ने कहा— “क्यों बना रहा है? पीने के लिए? या बस आदत है?” मैंने कटोरा मेज़ पर रख दिया। बिना पिए। बस खिड़की के पास खड़ा रहा। हनुमानगढ़ की सुबह में धुंध अभी भी थी।…