(Inner Dialogue – DAILY) सुबह की पहली किरण ने खिड़की से झाँका तो मन ने तुरंत पूछ लिया: “आज फिर वैलेंटाइन डे है… क्या तू तैयार है इस दिन के लिए?” मैंने हल्के से मुस्कुराकर जवाब दिया: “तैयार तो हर दिन होना चाहिए… लेकिन आज थोड़ा और खास सवाल है – क्या मैं खुद से…
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आत्मसंवाद | Inner Dialogue
आत्मसंवाद | Inner Dialogue – Morning सुबह है…और मन अभी पूरी तरह जागा नहीं है।कुछ ख्याल आधी आँखों में अटके हैं,जैसे नींद और सच के बीच कोई जगह हो। आज आईने में खुद से कोई वादा नहीं किया।बस इतना कहा—दिन जैसा भी हो,मैं खुद से लड़कर नहीं जिऊँगा। सुबह की यह शांति बता गईकि हर…