(Inner Dialogue – DAILY) सुबह की पहली किरण ने खिड़की से झाँका तो मन ने तुरंत पूछ लिया: “आज फिर वैलेंटाइन डे है… क्या तू तैयार है इस दिन के लिए?” मैंने हल्के से मुस्कुराकर जवाब दिया: “तैयार तो हर दिन होना चाहिए… लेकिन आज थोड़ा और खास सवाल है – क्या मैं खुद से…
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आत्मसंवाद | Inner Dialogue – DAILY
Day : 31 Janaury 2026 आज खुद से कहा—तू ज़िम्मेदार नहीं,तू लगातार चुप रहने की कीमत चुका रहा है। जो तूने “चलने दिया”,वही धीरे-धीरेतेरी हदें तय करने लगा। कड़वा सच ये है—तुझे सबसे ज़्यादा चोटदूसरों से नहीं,खुद से किए गए समझौतों ने दी है। –Rakesh Karwasra copyright@rakeshkarwasra.com