सुबह की पहली रोशनी खिड़की से आई तो मन ने कहा: “कल तूने पुराने में नया ढूँढने की बात की… आज क्या ढूँढा?” मैंने चाय बनाई। वही पुरानी गैस, वही पुरानी केतली, वही पुरानी आवाज़। लेकिन आज मैंने ध्यान से सुना। केतली की सीटी में एक छोटी सी लय थी – जैसे कोई पुराना गाना…
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आज का आत्मसंवाद – 21 फरवरी 2026 (Inner Dialogue – DAILY)
सुबह उठकर सबसे पहले मन ने पूछा: “कल तूने कहा था – गर्माहट हो या ठंडक, दोनों मेरी हैं… आज क्या फील हो रहा है?” मैंने खिड़की खोली। आज हवा में न ठंडक थी, न तेज़ गर्मी। बस एक हल्की-सी नरमी। चाय बनाई – न ज्यादा गर्म, न ठंडी। बिल्कुल संतुलित। जैसे प्रकृति भी कह…