2 फरवरी, 2026 | सोमवार
सोमवार की सुबह। अलार्म बजा, आँखें खुलीं, और दिल ने कहा — “बस पाँच मिनट और।”
पर ये पाँच मिनट सिर्फ नींद के लिए नहीं होते। ये पाँच मिनट उस हफ्ते के लिए होते हैं जो अभी शुरू भी नहीं हुआ, पर पहले से ही थका देने वाला लग रहा है।
आज मन ने पूछा — “क्या हर सोमवार ऐसा ही भारी लगेगा?”
शायद हाँ, शायद नहीं। पर जो बात समझ आई वो ये है — सोमवार भारी इसलिए नहीं लगता क्योंकि काम बहुत है। सोमवार भारी इसलिए लगता है क्योंकि हम पूरे हफ्ते का बोझ एक साथ उठाने की कोशिश करते हैं।
आज बस एक दिन है। बस आज पर ध्यान दो।
कल का सोचोगे तो परसों आएगा ही। पर अगर आज को पूरी तरह जिया, तो शायद सोमवार इतना बुरा भी नहीं लगे।
एक कप चाय, एक गहरी सांस, और बस शुरुआत कर दो। बाकी सब अपने आप ठीक हो जाएगा।
सोमवार मुबारक। आज तुम कर लोगे। 💪
–Rakesh Karwasra
copyright@rakeshkarwasra.com
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Shandar sir ….
धन्यवाद 🙏
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Fantastic Lines…
आपका बहुत-बहुत धन्यवाद! 😊
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