7 फरवरी, 2026
आज मैंने अपनी गलती माफ कर दी
पिछले हफ्ते एक दोस्त से बुरी तरह लड़ा था। ऑफिस की टेंशन थी, घर में भी कुछ ठीक नहीं चल रहा था, और उसी बीच उसने एक मज़ाक किया। बस, मैं फट पड़ा। गुस्से में कुछ ऐसा बोल गया जो कभी नहीं बोलना चाहिए था।
उसकी आँखों में जो तकलीफ देखी, वो आज तक याद है।
तब से रोज रात को सोने से पहले वही सीन दिमाग में चलता है। “काश मैं चुप रह जाता। काश मैं उस पल को वापस ला सकता। कितना बेवकूफ हूँ मैं।”
आज सुबह कुछ बदला
शेव करते वक्त शीशे में अपनी आँखों में देखा। थकी हुई, बोझिल। खुद से पूछा:
“क्या तू सच में बुरा इंसान है?”
कोई जवाब नहीं आया। फिर पूछा:
“या बस एक इंसान है जिससे गलती हो गई?”
और तब, पहली बार उस सवाल का जवाब दिल से आया –
“हाँ, गलती हुई थी। लेकिन मैं बुरा नहीं हूँ।”
समझ आया एक सच
हम दूसरों की सैकड़ों गलतियाँ माफ कर देते हैं। भाई ने कुछ गलत बोला? छोड़ो यार। माँ ने गुस्से में डाँट दिया? अरे उनकी उम्र हो गई है। दोस्त भूल गया बर्थडे विश? कोई बात नहीं, बिजी होगा।
लेकिन अपनी एक गलती?
उसके लिए हम खुद को महीनों, सालों सज़ा देते रहते हैं। रात-रात भर जागते हैं। खुद से नफरत करते हैं। सोचते हैं – “मैं कैसा इंसान हूँ?”
क्यों?
क्या हम दूसरों से कम इंसान हैं? क्या हमें माफी का हक नहीं?
आज मैंने तय किया
अपनी उस एक पुरानी गलती को माफ करूँगा। उस बोझ को अब और नहीं ढोऊँगा।
शीशे में देखकर खुद से कहा:
“सुन, तूने गलती की थी। हाँ, बहुत बड़ी गलती। लेकिन तू सीख रहा है। तू बदल रहा है। तू बढ़ रहा है।
तू परफेक्ट नहीं है, और होने की ज़रूरत भी नहीं।
तू सिर्फ इंसान है। और इंसान से गलतियाँ होती हैं।
आज से… मैं तुझे माफ करता हूँ।”
और फिर…
हाथ काँपते हुए उस दोस्त को मैसेज किया:
“यार, सॉरी। बहुत गलत बोला था मैंने। तू मेरे लिए बहुत मायने रखता है। माफ कर दे।”
दो मिनट बाद रिप्लाई आया:
“अरे पागल, कब का भूल गया। तू ठीक है ना?”
आँखों में आँसू आ गए। बस इतना ही काफी था।
आज का सबक
माफी माँगना मुश्किल है।
लेकिन खुद को माफ करना… उससे भी ज़्यादा मुश्किल।
हम सबसे सख्त जज खुद के लिए होते हैं। सबसे कठोर सज़ा खुद को देते हैं।
आज से इतना करें – जितनी दयालुता दूसरों को देते हैं, उसका आधा भी खुद को दे दें।
आप भी माफी के हकदार हैं। अपनी ही माफी के।
💭 एक सवाल आपसे:
आप कौन सी पुरानी गलती के लिए आज भी खुद को कोस रहे हैं?
क्या आज… बस आज… उसे जाने दे सकते हैं?
शायद वो बोझ उठाने की ज़रूरत नहीं है अब।
शायद आप पहले से ही काफी सीख चुके हैं।
शायद… आप माफी के लायक हैं। हमेशा थे।
🕊️ “गलती करना इंसानी फितरत है। माफ करना… वो भी।”
-Rakesh Karwasra
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