8 फरवरी, 2026
जब कोई समझ नहीं पाया तो क्या हुआ?
आज एक बात समझ आई।
सुबह एक दोस्त को अपनी परेशानी बताई। उम्मीद थी कि समझेगा। लेकिन उसने बस कहा – “ओवरथिंक मत कर यार, सब ठीक हो जाएगा।”
मन में आया – “तुझे क्या पता मैं क्या महसूस कर रहा हूँ?”
फिर रुका। और सोचा।
क्या हर किसी को समझना ज़रूरी है?
नहीं।
कुछ दर्द सिर्फ आपके होते हैं। कुछ लड़ाइयाँ सिर्फ आप लड़ सकते हैं। और यह बिल्कुल ठीक है।
लोग समझने की कोशिश करेंगे। कुछ समझेंगे, कुछ नहीं। कुछ सुनेंगे, कुछ सलाह देंगे जो काम नहीं आएगी।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपकी तकलीफ कम है।
इसका मतलब यह नहीं कि आप अकेले हैं।
आज खुद से कहा
“मुझे किसी की मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं कि मैं क्या महसूस कर रहा हूँ।
मेरा दर्द सच है। मेरी खुशी सच है। मेरा डर सच है।
भले ही दुनिया न समझे… मैं खुद को समझता हूँ।“
और कभी-कभी बस इतना ही काफी होता है।
“सबसे ज़रूरी बातचीत वो है जो आप खुद से करते हैं।”
-Rakesh Karwasra
copyright@rakeshkarwasra.com