शाम ढल रही थी। हनुमानगढ़ की गलियों में लालिमा फैल रही थी—जैसे कोई पुराना ज़ख्म फिर से खुल रहा हो। चाय का कटोरा हाथ में ठंडा हो चुका था। दिन की थकान कुर्सी पर ढेर हो गई थी। मन ने धीरे से, जैसे गले में कुछ अटक गया हो, पूछा: “रिश्ते… आज भी थामे रहे?”

मैंने आँखें बंद कीं। दिन की छोटी-छोटी बातें आँखों के सामने तैरने लगीं— एक मुस्कान जो अधूरी रह गई, एक “सॉरी” जो गले में अटककर रह गया, एक गले लगना जो कभी नहीं हुआ, एक “आई लव यू” जो कभी बाहर नहीं निकला।
आँसू आ गए। मन रो पड़ा (बिना आवाज़ के): “हम उन्हें थामने की कोशिश करते हैं… पर थामते-थामते हाथ काँप जाते हैं। कभी अहंकार, कभी डर, कभी पुरानी बातें— सब बीच में आ जाते हैं। रिश्ता कोई लोहे की चेन नहीं… वो सूत की डोर है, राकेश। जितना प्यार से थामोगे, उतनी मज़बूत रहेगी। जितना ज़ोर से खींचोगे… उतनी जल्दी टूट जाएगी। और टूटने पर जो दर्द होता है… वो कभी नहीं जाता।”
मैं चुप रहा। चाय का आखिरी घूँट लिया—कड़वा था। फिर बोला (आवाज़ काँपती हुई, आँसू गाल पर लुढ़कते हुए): “तो अब क्या करें? रिश्तों को ऐसे ही छोड़ दें? बिना कुछ कहे, बिना माफ़ी माँगे, बिना गले लगाए? या थककर बस चुप हो जाएँ?”
मन ने सिर झुकाकर कहा (आवाज़ में दर्द और प्यार दोनों): “नहीं। रिश्ते छोड़ने के लिए नहीं होते। वे थामने के लिए होते हैं— खासकर तब, जब हाथ काँप रहे हों। जब आँसू आ रहे हों। जब दिल कह रहा हो—‘अब बहुत हो गया’। तब भी थाम लो। थोड़ा सा नाम ले लो। थोड़ा सा चुप रहकर सुन लो। थोड़ा सा गले लगा लो—खुद से भी। क्योंकि जो आज थोड़ा सा थाम लिया… वही कल पूरा हो सकता है। और जो आज खो दिया… वो कभी नहीं मिलता। कभी नहीं।”
आज का संकल्प (आँखों में आँसू, दिल में थोड़ी सी उम्मीद):
- आज रात सोने से पहले एक रिश्ते को याद करूँगा।
- न सुधारने की कोशिश करूँगा, न बहाने बनाऊँगा।
- बस याद करूँगा… और मन ही मन कहूँगा: “तू मेरे पास था… आज इतना ही काफी है। कल फिर कोशिश करूँगा। पर आज… तू मेरे दिल में है, यही बहुत है।”
आज का सवाल (खुद से, गले में कुछ अटकते हुए): अगर आज मैं किसी रिश्ते को बिना कुछ कहे, बिना कुछ सुधारे, बस ऐसे ही थाम लूँ— तो क्या वो डोर टूट जाएगी… या मेरे हाथों में और मज़बूत हो जाएगी?
मेरा जवाब (आँसू गाल पर लुढ़कते हुए, मुस्कान के साथ): आज मैंने थामा। और लगा… वो पहले से ज़्यादा पास आ गया। शायद इसलिए कि आज मैंने उसे सुधारने की बजाय… प्यार करने दिया। और प्यार में थकान भी मीठी लगती है।
शुभ संध्या, हनुमानगढ़ की लालिमा से सनी, थकी हुई लेकिन प्यार भरी शाम से। 🌅🤍 आज शाम किसी रिश्ते को थोड़ा सा याद कर लो। बिना कुछ कहे। बिना कुछ सुधारे। बस याद कर लो। देखना—कितना हल्का लगेगा दिल… और कितना भारी… वो प्यार।
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Heart touching lines