आत्मसंवाद | Inner Dialogue – Morning
सुबह है…
और मन अभी पूरी तरह जागा नहीं है।
कुछ ख्याल आधी आँखों में अटके हैं,
जैसे नींद और सच के बीच कोई जगह हो।
आज आईने में खुद से कोई वादा नहीं किया।
बस इतना कहा—
दिन जैसा भी हो,
मैं खुद से लड़कर नहीं जिऊँगा।
सुबह की यह शांति बता गई
कि हर नया दिन शुरुआत नहीं माँगता,
कभी-कभी
बस नरमी चाहता है।
आज का दिन
मैं धीरे जीऊँगा।
बिना साबित किए। 🌅
-Rakesh Karwasra
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