कभी-कभी रात को सोने से पहले जब हम मोबाइल की स्क्रीन बंद करते हैं, तो एक अजीब-सी थकान महसूस होती है। यह थकान शरीर की नहीं होती, यह मन की थकान होती है। पूरे दिन हम न जाने कितने लोगों की ज़िंदगी देख चुके होते हैं। किसी की नई कार, किसी की विदेश यात्रा, किसी…
Tag: जीवन की सच्चाई
अब शेष दिनों का उत्सव
–Rakesh Karwasra जब उम्र ने कंधे पर हाथ रखकर कहा—“चलो, अब थोड़ा धीमे चलें,”तब पहली बारमैंने समय की साँस सुनी। जो दिन बीत गए,वे अब स्मृतियों के दीप हैं,और जो बचे हैं—वे उधार की रोशनी नहीं,मेरी अपनी ज्योति हैं। अब किसी की विदाई पर आँसू नहीं,क्योंकि जानाजीवन का अपमान नहीं—उसकी पूर्णता है। मेरे बाद क्या…