सुबह उठा तो खिड़की से ठंडी हवा आई। चाय बनाई, लेकिन आज कप में डालते वक्त हाथ रुक गया। मन ने कहा— “क्यों बना रहा है? पीने के लिए? या बस आदत है?” मैंने कटोरा मेज़ पर रख दिया। बिना पिए। बस खिड़की के पास खड़ा रहा। हनुमानगढ़ की सुबह में धुंध अभी भी थी।…
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आज का आत्मसंवाद – 1 मार्च 2026 (Inner Dialogue – DAILY – रविवार)
रविवार की सुबह। हनुमानगढ़ में धूप धीरे-धीरे आ रही थी—जैसे कोई पुराना दोस्त दरवाज़े पर खड़ा होकर कह रहा हो: “बस थोड़ा रुक जा… आज कुछ नहीं करना।” चाय बनाई। कटोरा हाथ में लिया। खिड़की के पास खड़े होकर बाहर देखा। कोई जल्दबाज़ी नहीं। न कोई काम का बोझ। न कोई प्लान। बस सुबह थी।…