4 फरवरी, 2026 | बुधवार
बुधवार। हफ्ते का बीच का दिन। न शुरुआत का जोश, न अंत की राहत।
आज मन में एक सवाल उठा — “मैं कहाँ जा रहा हूँ?”
कभी-कभी ऐसा लगता है कि हम बस चल रहे हैं, बिना किसी दिशा के। सुबह उठे, काम किया, रात को सो गए। और फिर वही सब कल। पर क्यों? किसलिए?
ये सवाल डराते हैं। इसलिए हम इन्हें दबा देते हैं, भुला देते हैं, भागते रहते हैं।
पर आज मैंने सोचा — शायद रास्ता साफ न दिखना भी ठीक है। शायद हर कदम पर मंज़िल दिखनी ज़रूरी नहीं। शायद बस अगला कदम उठाना काफी है।
जीवन कोई सीधी रेखा नहीं है। ये एक घुमावदार रास्ता है, जहाँ कभी मोड़ आते हैं, कभी ढलान। और कभी-कभी हम खो भी जाते हैं।
पर खो जाना भी एक तरह से खोज है।
तो आज, अगर रास्ता साफ न दिखे, तो घबराओ मत। बस चलते रहो। धीरे-धीरे रास्ते बनते हैं, मिलते नहीं।
तुम सही जा रहे हो। भले ही अभी ये दिख न रहा हो।
जब आपको रास्ता साफ नहीं दिखता, तब आप क्या करते हैं?
-Rakesh Karwasra
copyright@rakeshkarwasra.com
Good job..
Sahi kaha Beo
Right Bro