4 फरवरी, 2026 | बुधवार बुधवार। हफ्ते का बीच का दिन। न शुरुआत का जोश, न अंत की राहत। आज मन में एक सवाल उठा — “मैं कहाँ जा रहा हूँ?” कभी-कभी ऐसा लगता है कि हम बस चल रहे हैं, बिना किसी दिशा के। सुबह उठे, काम किया, रात को सो गए। और फिर…
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आत्मसंवाद | छोटी-छोटी जीत भी जीत होती हैं
3 फरवरी, 2026 | मंगलवार आज सुबह एक अजीब सी बात हुई। मैंने अपनी to-do list देखी और महसूस किया — कल जो पाँच काम पूरे किए, उनकी खुशी से ज़्यादा उन दस कामों का बोझ है जो अभी बाकी हैं। यही तो हमारी आदत है। जो हो गया उसे भूल जाओ, जो नहीं हुआ…
आत्मसंवाद | जब सोमवार भारी लगे
2 फरवरी, 2026 | सोमवार सोमवार की सुबह। अलार्म बजा, आँखें खुलीं, और दिल ने कहा — “बस पाँच मिनट और।” पर ये पाँच मिनट सिर्फ नींद के लिए नहीं होते। ये पाँच मिनट उस हफ्ते के लिए होते हैं जो अभी शुरू भी नहीं हुआ, पर पहले से ही थका देने वाला लग रहा…